देश भक्ति की कहानी Dr Praveen Jain Kochar की ज़ुबानी

‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले , वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।
कभी वह दिन भी आयेगा जब अपना राज देखेंगे , जब अपनी ही जमीं होगी जब अपना आसमां होगा।”
पंडित जगदम्बा प्रसाद मिश्र की इस कालजायी कविता के ये शब्द हमें उन दिनों में आज़ादी की महत्ता एवं उसे प्राप्त करने के लिए चुकाई जाने वाली कीमत का एहसास कराने के लिए काफी हैं। यह वह दौर था जब देश का हर बच्चा बूढ़ा और जवान देश प्रेम की अगन में जल रहे थे। गोपाल दास व्यास द्वारा सुभाष चन्द्र बोस के लिए लिखी गई कविता के कुछ अंश आगे प्रस्तुत हैं जो उस समय देश के नौजवानों को उनके जीवन का लक्ष्य दिखाती थीं-
”वह ख़ून कहो किस मतलब का , जिस में उबाल का नाम नहीं
वह ख़ून कहो किस मतलब का ,आ सके जो देश के काम नहीं”
इस समय जब देश का हर वर्ग देश के प्रति अपना योगदान दे रहा था तब हिन्दी सिनेमा भी पीछे नहीं था “जागृति” का गीत ”हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के” हमारे बच्चों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराता था।
आज़ादी के आन्दोलन में उस समय की युवा पीढ़ी कि भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। शहीद भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, अश्फाक उल्लाह ख़ान जैसे युवाओं ने अपनी जान तक न्योछावर कर दी थी देश के लिए। ये जांबाज सिपाही भी अपनी भावनाओं को गीतों में व्यक्त करते हुए कहते थे, “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए क़ातिल में है।”

This is one of the best Desh Bhakti Inspirational Story by Astrologer Dr Praveen Jain Kochar

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